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लोहार की चोट



सोहन एक मेहनती लड़का था| वह पढाई में अच्छा था और क्लास के अच्छे बच्चों में उसकी गिनती होती थी| वह एक निम्न सामान्य परिवार से था| उसके पिता की एक छोटी सी पान की दुकान थी और माँ ग्रहणी थी| घर के हालात ज्यादा अच्छे नहीं थे| वह हमेशा इस बात से चिंतित रहता था कि कैसे वो अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुधार सके, इसलिए वह कॉलेज से आने के बाद अपने पिता की दुकान में मदद करता था|

उसके साथ वाले कई अच्छे घरों के बच्चे उसे
पान वाले” ”तम्बाकूऐसे गंदे नाम लेकर चिड़ाते रहते थे| उसे अपने पिता के काम की ऐसी मजाक सुनना अच्छा नहीं लगता था| वह पढाई के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी करता रहता था और समय-समय पर कई प्रतियोगी परीक्षायें भी देता रहता था,लेकिन बार-बार प्रयास के बाद भी उसे सफलता नहीं मिली| इस बात से वह बहुत दुखी रहता था कि वह भगवान से अपने दुःख दूर करने के लिए कितनी प्राथर्ना करता हैपर भगवान उसकी नहीं सुन रहा है|

एक दिन जब वह एक प्रतियोगी परीक्षा का रिजल्ट देख कर आ रहा था तो वह बहुत दुखी हो गया था, क्योंकि इस परीक्षा के लिए उसने बहुत मेहनत करी थी, लेकिन वह इस परीक्षा में सफल नहीं हो पायाइस परीक्षा से उसे बहुत उम्मीद थी, पर ना निकल पाने के कारण वह इतना उदास हो गया कि घर आते समय वह कभी खुद के भाग्य को कोसता कि भगवान ने उसे अमीर घर में जन्म नहीं दिया तो कभी भगवान को कोसता कि भगवान भी उसका साथ नहीं दे रहा है और वह बार-बार प्रयास के बाद भी सफल नहीं हो पा रहा है| वह रास्ते में उदास होके जा रहा था|

रास्ते में वह एक सुनार की दुकान से होकर गुजरता है तो देखता है कि सुनार सोने के हार को बड़ी सावधानी से तराश रहा है, सुनार पे एक छोटी से हथोड़ी है जिसे सुनार धीरे-धीरे बड़े प्यार से मार रहा कि कहीं कोई ऐसी चोट ना लग जाये, जिससे नुकसान हो जाये| फिर जो हार तैयार होता है वह दिखने में तो बहुत सुन्दर है पर है बहुत नाजुक|

फिर थोडा आगे चलकर वह एक लोहार की दुकान से गुजरता है वहां वह देखता है कि लोहार लोहे से फावड़ा बना रहा है ।
 वह लोहे को आग में डालकर गर्म करता है फिर उसके ऊपर अपना बड़ा सा हथोड़ा बड़ी बेरहमी से मारता है| फिर जो फावड़ा तैयार होता है वो दिखने में तो इतना सुन्दर नहीं है पर है बहुत कठोर और मजबूत|

आज उसे एहसास हुआ कि
 वह व्यर्थ में अपने भाग्य को कोसता है और व्यर्थ में ही भगवान को दोष देता है| उसका जीवन तो उस फावड़े की तरह है जो जीवन की कठिनाइयों की आग में तपकर और संघर्ष रुपी हथोड़े की चोट खाकर इतना मजबूत हो गया है कि वह अब हर मुश्किल का सामना कर सकता है| आज के बाद उसने मुश्किल परिस्थितियों में हार ना मानने का सबक लिया और अपनी मेहनत पर भरोसा किया कि एक दिन वह जरुर सफल होगा|

प्रिय दोस्तों,  हम भी जीवन की परेशानियों से कई बार हार मान लेते हैं और फिर अपने भाग्य को या भगवान को कोसते हैं| ध्यान रहे दोस्तों,  जीवन की परेशानियाँ हमे कुछ ना कुछ सिखा के ही जाती हैं और हमे मजबूत बनाती हैं|  इन परेशानियों से हिम्मत हारने के बजाए हमें इनसे कुछ सीखना चाहिए और मेहनत करते रहना चाहिए|  एक दिन हमारी मेहनत जरुर रंग लाएगी और हम जरुर सफल होंगे|