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जिंदगी से नहीं, जिंदगी के लिए



मृदुल और कमलेश एक दूसरे के पड़ोसी थे और दोस्त भी थे| दोनों ही सरकारी इंजीनियर थे और दोनों के परिवार में किसी भी चीज की कोई कमी नहीं थी|

मृदुल और कमलेश के व्यवहार में बड़ा अंतर था| मृदुल अपने नाम के अनुरूप बड़ा ही मृदुभाषी,शांत और चेहरे पे मुस्कान लिए रहता था| जबकि कमलेश बात-बात पे चिड़ जाया करता था और गुस्सा हो जाया करता था| जब भी कमलेश मृदुल से मिलता तो उसके मन में भी मृदुल जैसा व्यवहार अपने अन्दर लाने की भावना जागृत होती थी| लेकिन काफी कोशिशों के बाद भी वह अपने व्यवहार में सुधार नहीं कर पाया|

एक दिन कमलेश अपने बेटे को खिलोने वाली कार के टूट जाने पर डांट रहा था जो की उसके बेटे ने खेल-खेल में तोड़ दी थी| तभी मृदुल कमलेश के घर आया तो उसने देखा कि कमलेश अपने बेटे पे गुस्सा हो रहा है| मृदुल को आते देख कमलेश थोडा सा चुप हो गया| मृदुल ने परिस्थिति को पहचान लिया था| उसने उसके बेटे को अपने पास बुलाया और प्यार से पूछा कि बेटा! तुम्हे पता है कि तुम्हारे पिताजी तुम पर गुस्सा क्यों कर रहे हैं?


बेटा कुछ देर शांत रहा मानो उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या बोले| तब मृदुल ने प्यार से समझाया कि बेटा! तुम्हारे पिताजी तुम्हारे लिए यह कार इसलिए लाये थे ताकि तुम इस कार से खेलो,अपनी चीजों की देखभाल करो और जिम्मेदार बन सको| जब तुमने इसे तोड़ दिया तो तुम्हारे पिताजी को गुस्सा आ गया, पर तुम्हारे ऊपर गुस्सा करके वो भी दुखी हैं|

यह सुनकर बेटे को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने तुरंत अपने पिताजी से माफी मांगी| तब मृदुल ने कमलेश के बेटे को प्यार से बोला कि बेटा! तुम वादा करो कि तुम आगे से अपनी चीजों का ख्याल रखोगे,क्योंकि अपनी चीजों की देखभाल करना अच्छी आदत है| तब कमलेश के बेटे ने कमलेश से कहा कि पिताजी!वह आगे से अपनी चीजों की देखभाल करेगा और आपको दुःख नहीं पहुँचाएगा|

बेटे के मुँह से यह शब्द सुनकर कमलेश ने अपने बेटे को गले लगा लिया और उसने भी कहा कि वह भी आज के बाद उसपे गुस्सा नहीं करेगा| तब कमलेश का बेटा खुशी-खुशी अपने कमरे में पढ़ने के लिए चला गया| बेटे के कमरे में जाने के बाद कमलेश ने मृदुल को गले लगा लिया और बहुत-बहुत धन्यवाद दिया कि उसने उसके बेटे को अच्छी शिक्षा दी जो की वह गुस्से के कारण नहीं दे पाता|

आज कमलेश से नहीं रहा गया और उसने मृदुल से पूछ ही लिया कि आखिर वह इतना शांत कैसे रहता है? उसने मृदुल को बताया कि उसने भी मृदुल जैसा व्यवहार अपने अन्दर लाने की कोशिश की थी पर वह नहीं कर पाया| उसने मृदुल से विनती करी कि उसे भी उसके जैसा व्यवहार लाने के लिए वह उसका मार्गदर्शन करे|

मृदुल मुस्कुराते हुए बड़े प्यार से बोला कि मित्र यह तो बहुत आसान काम है| तुम यह सब बड़ी आसानी से पा सकते हो| तुम्हे जिंदगी से उम्मीदें होंगी,कुछ शिकायत भी होंगी कि जिंदगी ने यह नहीं दिया,ऐसा जीवन होना चाहिए था,पर मुझे जिंदगी से कोई भी शिकायत नहीं रहती| मैं मानता हूँ की जिंदगी ने हमें जीवन दिया है,इससे बढकर और क्या चाहिए? अब जिंदगी के दिए हुए इस जीवन को जीना तो हमारे हाथ में है कि हम उसे कैसे जी रहे हैं?| शांति से जी रहे हैं या गुस्सा या तनाव में जी रहे हैं| यह जीवन हमारा है हम जैसे चाहे वैसे जी सकते हैं| अगर तुम ऐसा सोच के अपना जीवन जियोगे तो देखना कि तुम्हारा जीवन भी बड़ा खुशहाल होगा और तब तुम्हें कभी अपनी जिंदगी से कोई भी शिकायत नहीं होगी| जिंदगी में सुख दुःख तो आते रहते हैं और मै उन्हें जीवन का महज एक पड़ाव समझ कर स्वीकार करता हूँ| सुख हो या दुःख मुझे कुछ ना कुछ सिखा के जरुर जाते हैं| मृदुल की यह बातें सुनकर आज कमलेश को जिंदगी को खुशहाल बनाने के अमूल्य ज्ञान की प्राप्ति हुई| और उसका जीवन भी खुशहाल बन गया|

प्रिय दोस्तों,जिंदगी से कभी भी शिकायत मत करो बल्कि जिंदगी के लिए कुछ करो| जिंदगी ने हमे अमूल्य जीवन दिया है उसे हम कैसे जी रहे हैं यह तो हमारे हाथ में है|
                                                          धन्यवाद|  


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