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मुश्किल वक़्त का फैसला


एक बार की बात है, नरेन्द्रपुर गाँव में भयंकर सूखा पड़ गया| त्राहि-त्राहि मच गयी, गाँव के सभी कुएँ, तालाब और पानी के स्रोत सूख गये| इंसान और जानवर पानी के लिए तड़पने लगे| सबकी उम्मीद आसमान की तरफ थी कि बारिश होगी और सूखा खत्म हो जायेगा, पर धीरे-धीरे उम्मीदें टूटने लग गयी| बचा हुआ पानी भी खत्म होने लग गया था| इंसान का जीवन पानी के बिना अकल्पनीय है, दैनिक जीवन के सभी कार्य पानी पर निर्भर हैं| इस घोर विकट स्थिति में सब लोगों ने गाँव छोड़ने का निश्चय किया, अपने-अपने सगे-सम्बन्धियों और पशुओं के साथ सब अपनी-अपनी समझ से किसी उपयुक्त स्थान की ओर चल पड़े|

उसी गाँव में एक आचार्य अपने तीन बेटों के साथ रहते थे, जब उन्हें भी लगा कि अब यहाँ रहकर बारिश की उम्मीद करना उचित नही है तो उन्होंने भी अपने तीन बेटों के साथ सबसे अंत में गाँव छोड़ने का फैसला किया| दूर-दूर तक कोई जानवर तक नही दिखाई दे रहा था, आस-पास के गाँव भी सारे खाली हो गये थे|

कई मील पैदल चलने के बाद वे एक गाँव के समीप पहुंचे ही थे कि उनका सबसे छोटा बेटा प्यास से बेहाल होकर और चलने में असमर्थता दिखाते हुये वहीँ पर बेहोश हो गया| आचार्य ने अपने पहले बेटे को तुरंत पानी की व्यवस्था करने को कहा| थोड़ी देर चलने के बाद पहले बेटे ने देखा कि गाँव के बाहर एक नदी बह रही है जहाँ बहुत सारे लोग कपड़े धो रहे थे, कुछ लोग नहा रहे थे, और कुछ लोग अपने पशुओं को साफ़ कर रहे थे तो नदी का पानी काफी गन्दा सा दिख रहा था| उसको लगा कि ऐसा गन्दा पानी ले जाना ठीक नही है और पानी के लिए वह गाँव की तरफ चल पड़ा|

काफी देर तक जब वह नहीं आया तो आचार्य ने बेहोश पड़े बेटे को देखकर दूसरे बेटे को पानी लेने भेजा, कुछ ही देर बाद दूसरा बेटा पानी ले आया| आचार्य ने उस बेहोश पड़े बेटे पर पानी छिड़का, उसके होश में आने के बाद उसे पानी पिलाया गया, खुद भी पिया और इस प्रकार उस बेहोश बेटे की जान पे जान आयी| तभी पहले वाला बेटा पानी लेकर दौड़ता हुआ आया|

आचार्य ने पहले बेटे से पूछा, तुम्हें पानी लाने में इतनी देर क्यों हो गयी? पहले बेटे ने जवाब दिया, पिताजी! नदी का पानी गन्दा था तब इस वजह से मैं पानी लेने गाँव की ओर चल पड़ा| तब आचार्य ने आश्चर्य में दूसरे बेटे से पूछा, वह फिर इतनी जल्दी पानी लेकर कैसे आ गया? दूसरे बेटे ने कहा, पिताजी! पहले मैंने भी यही सोचा था कि पानी तो बहुत गन्दा है फिर तुरंत ही मैंने सोचा कि क्यों ना ऊपर की तरफ चला जाये और जब मैं नदी के ऊपर की तरफ चलता गया तो मैंने देखा कि ऊपर से तो पानी साफ़ ही आ रहा था, जहाँ से गाँव के अन्य लोग भी पानी भर रहे थे| मैं भी जल्दी से वहीं से पानी लेकर आ गया|

आचार्य ने यह सुनते ही तीनों बेटों को समझाते हुए कहा, विपरीत परिस्थितियों में हम जैसा फैसला लेते हैं वही हमारे भविष्य का निर्धारण करता है| विपरीत परिस्थितियाँ इंसान के तन और मन दोनों को हिला देती हैं लेकिन अपनी समझदारी और कौशल से हम इन मुश्किल परिस्थितियों पर विजय पा सकते हैं| बस हमे अपने दिमाग को शांत रखना होगा और सबसे सुगम उपाय ढूँढ इन हालातों से निकलने की तरकीब सोचनी चाहिए| यदि जीवन में एक मुश्किल आती है तो उसके ढेर सारे उपाय भी होते हैं, यह तो आप पर निर्भर करता है कि आप कौन सा वाला उपाय चुनकर इन कठोर हालातों से पार पा सकते हो|


प्रिय दोस्तों, मुश्किल वक़्त कभी भी बोल कर नहीं आता, जीवन की इन मुश्किल घड़ियों में हम जैसा फैसला लेते हैं वही हमारे आगे के जीवन की दिशा निर्धारित करता है| तभी तो आपने देखा होगा कि एक ही जैसी परिस्थितियों में कुछ लोग टूट कर बिखर जाते हैं और कुछ इतिहास ही बना देते हैं| यदि आप भी किसी मुश्किल वक़्त से गुजर रहे हो तो एक बार ठन्डे दिमाग से सोचो, उस परेशानी का समाधान भी जरुर आस-पास ही होगा| बदलतीसोच (badaltisoch.com) इस कहानी के माध्यम से यह बताना चाहती है कि आप भी अपने मुश्किल वक़्त में सही फैसले लें, ताकि आप हर मुश्किल हालातों का डट कर सामना करके उन पर विजय हासिल कर सकें| धन्यवाद|




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