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बच्चा बुलाये मम्मी-पापा



आज की भागमभाग जीवनशैली एवं भौतिक सुख-साधनों को जुटाने में माता-पिता दोनों ही इतने व्यस्त हो गये हैं कि उन्हें यह भी ध्यान नहीं रहता कि हमें अपने बच्चों को भी समय देना है, उनकी समस्यायें सुननी है, समझनी है और निदान भी करना है|

आज बच्चों और अभिभावकों के बीच बढ़ती संवादहीनता ही बच्चों में कई प्रकार की बुराइयाँ ला रही है| होता यह है कि माता-पिता दोनों ही नौकरी पेशा होने के कारण थक कर घर आते हैं और बच्चों के जिज्ञासा से भरे प्रश्नों का जवाब संतोषजनक देने के बजाय उन्हें चुप करा देते हैं|  जिससे बच्चा अपने जिज्ञासा भरे प्रश्नों को अपने सहपाठियों से पूछता है चूँकि दूसरा बच्चा भी उसी की हमउम्र होता है इसलिए वह भी अपनी उम्र के हिसाब से बतायेगा| इस प्रकार बच्चों पर सहपाठियों का प्रभाव जल्दी पड़ता है और इसी वजह से जल्दी ही दोस्तों के प्रभाव में आकर उचित-अनुचित के अभाव में बुरी आदतों के शिकार होने की सम्भावना अत्यधिक बड़ जाती है| जिससे कि नशा और धूम्रपान जैसी बुरी आदतें बच्चों में स्कूल समय से ही पनपने लगी हैं|

एक तो एकल परिवार ऊपर से माता-पिता दोनों का घर से बाहर रहना, बच्चा सदैव घर आकर अपनी माँ को देखना, उससे बातें करना ज्यादा पसंद करता है| परन्तु आजकल की भौतिक सुख साधनों से परिपूर्ण संपन्न जीवनशैली के निर्वाह के लिए पति-पत्नी दोनों का रोजगार करना भी आवश्यक हो गया है, पर जो माँ गृहणी हैं उन्हें भी ध्यान रखना होगा कि बच्चे को घर में अकेला ना छोड़ा जाये| अपने बाजार के कार्य और अन्य घरेलू कार्यों का इस प्रकार निपटारा किया जाये कि घर मे बच्चों की परवरिश पर ध्यान दिया जा सके| बच्चा घर में अकेला रहने पर बुरी आदतों की गिरफ्त में जल्दी आता है क्योंकि उसे पता है कि घर में उसे देखने वाला कोई नहीं है|

घर में माता-पिता को बच्चे से धैर्य-पूर्वक व्यवहार करना होगा, उसकी बातचीत का दायरा बढ़ाकर उसकी समस्यायें सुननी होंगी और उनका समाधान निकालना होगा ताकि बच्चा अपने को उपेक्षित व असुरक्षित ना महसूस करे|

ध्यान रहे ! माता-पिता का साथ बच्चे को सदैव सुरक्षा की भावना प्रदान करता है, उसके आत्मविश्वास को बढ़ाता है और उसे अच्छा करने के लिए प्रेरित करता है| आप बच्चे को महंगी चीजें मत दीजिये, केवल उसका साथ दीजिये, उससे बात कीजिये, उसके लिए एक अच्छे माता-पिता बनिए| बच्चे से दिखावा मत कीजिये, उसे सरल और सहज इंसान बनने दीजिये यही सबसे बड़ी जमा पूंजी है|

ऊँचा पद, ऊँची सोसाइटी, ऊँचा रहन-सहन, समाज में ऊँचा स्थान पाने की होड़ में अपने बच्चों के मन में अपने लिए जगह कम ना होने दें| आखिर हम इतनी भागमभाग क्यों कर रहे हैं? जरा सोचो? जिन बच्चों के लिए कर रहे हैं वह भी तो खुश रहें, तभी तो वह जीवन में आगे बढ़ पायेंगे| आप बच्चे को समय दीजिये फिर देखिये वह एक दिन बहुत बड़ा आदमी ना सही, एक अच्छा इंसान जरुर बनेगा|


प्रिय दोस्तों, माता-पिता होने के नाते अपने बच्चों से मधुर सम्बन्ध बनायें और माता-पिता आपस में भी संबंधों में मधुरता बनाये रखें| बच्चों की दुनिया माता-पिता से शुरू होती है| उसके अन्दर सकारात्मक उर्जा का संचार होने दें, फिर देखिये उसे सरल और सफल बनने से कोई नहीं रोक सकता| बदलतीसोच (badaltisoch.com) सभी माता-पिता और उनके बच्चों के उज्जवल भविष्य की कामना करता है| धन्यवाद|




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