A+ A-

एक पत्ती तोड़ देना



गोपाल एक अच्छे घर का लड़का था| उसके माता-पिता ने कभी उसके लिए किसी चीज की कोई कमी ना रखी थी| उसके अन्दर वैसे तो कोई कमी ना थी पर उसका व्यवहार बहुत ही गुस्सैल था, छोटी-छोटी बात पर अपना आपा खो देता था| उसकी इन्हीं आदतों की वजह से कई बार उसकी दूसरों से लडाईयाँ हो जाती और वह उन्हें भला-बुरा कह देता|

आस पड़ोस और स्कूल से कई बार शिकायतें आने के कारण परेशान होकर उसके पिता ने एक दिन उसे अपने पास बुलाया और प्यार से कहा, “ बेटा, अब जब भी तुम्हें गुस्सा आये तो तुम गुस्सा करने के बाद आस-पास मौजूद पेड़-पौधों से एक पत्ती तोड़ देना और पत्ती तोड़ते समय मेरी बात ध्यान करना कि आखिर गुस्से का कारण क्या था?| ध्यान रहे, यह काम पूरी ईमानदारी से करना, मैं रोज शाम को तुमसे पूछूँगा कि तुमने कितनी बार गुस्सा किया? फिर तुम मुझे उतनी ही पत्ती देना| “ गोपाल अपने पिताजी की इस बात पर सहमत हो गया|

पहले दिन गोपाल को तीस बार गुस्सा आया तो उसने शाम को पिताजी के पूछने पर तीस पत्तियाँ पिताजी को दे दी| उसके पिताजी ने एक शब्द कुछ ना कहा और चुपचाप पत्तियां पकड़ ली| धीरे-धीरे पत्तियों की संख्या घटने लगी| पहले वह गुस्सा करता तो अपनी ही धुन में बिना सोचे समझे रहता था, अब जब वह गुस्सा करता तो पत्तियाँ तोड़ते समय वह अपने पिताजी के बारे में जरुर सोचा करता था| बार-बार पिताजी की बात को याद करके उसे अपने व्यवहार की कमी और गुस्से के कारण के बारे में सोचने का समय मिल जाता| धीरे-धीरे उसका अपने गुस्से पर काबू बढ़ने लगा, और फिर एक दिन ऐसा आया जब उसने शाम को पिताजी को एक भी पत्ती नहीं दी|

कई हफ़्तों तक जब उसने शाम को पिताजी को एक भी पत्ती ना दी तो एक बार फिर उसके पिताजी ने उसे अपने पास बुलाया और कहा, “ बेटा, जाओ इन पत्तियों को फिर से उन्ही पेड़ों पर लगा दो|”

अपने पिताजी की इस बात को सुनकर गोपाल ने बड़े ही आश्चर्य से पिताजी की तरफ देखकर कहा, “ पिताजी यह कैसे संभव है, यह तो अब निर्जीव हो चुकी हैं और मुझे याद भी नही है कि कौन सी पत्ती किस पेड़-पौधे से तोड़ी है|

यह सुनते ही, गोपाल के पिताजी ने उसे समझाते हुए कहा, “ बेटा, जिस प्रकार यह पत्तियां अब दोबारा उन पेड़ों पर नहीं लग सकती और निर्जीव हो गई हैं, उसी प्रकार जिन लोगों पर तुमने बेवजह गुस्सा किया, उनके और तुम्हारे संबंधों पर भी कहीं ना कहीं कोई आघात जरुर लगा होगा, जिसने क्या पता उनसे तुम्हारे सम्बन्ध निर्जीव कर दिए हों| तुम्हें याद नही होगा कि तुमने किसके साथ कब?कैसा? बुरा व्यवहार किया पर जिसके साथ तुमने बुरा व्यवहार किया उसे जरुर याद होगा| “ उस दिन गोपाल को अपने व्यवहार पर बड़ी शर्मिंदगी महसूस हुई और उसने आगे कभी बेवजह किसी पर गुस्सा ना करने का प्रण लिया|

प्रिय दोस्तों, दैनिक जीवन में हम अपनी दैनिक समस्याओं की वजह से कई बार छोटी-छोटी बातों में दूसरों पर बेवजह गुस्सा कर देते हैं| जिससे हमारी छवि कहीं ना कहीं जरुर धूमिल होती है और रिश्तों में तनाव के पल भी आ जाते हैं| बदलतीसोच(badaltisoch.com) की ओर से आप सभी से यही गुजारिश है कि बेवजह गुस्से को न्योता ना दें| यदि कभी बेवजह गुस्सा आ भी जाये तो तुरंत अपने अहम् को एक किनारे करके अपने बुरे व्यवहार के लिए माफ़ी मांग लें, और अपने रिश्तों की मिठास को सदैव बनाये रखें| धन्यवाद|




जरुर पढ़ें :