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सोने के पंख वाला स्वर्ण-मोर



एक गरीब सब्जी वाला सब्जी बेचने शहर जाया करता था, रास्ते में एक जंगल पड़ता था, जिसे पार करने के बाद शहर आता था |

एक सुबह वह जंगल के रास्ते शहर जा रहा था, रास्ते में उसने देखा कि कुछ लोग एक सुनहरे मोर को पकड़ के ले जा रहे हैं और वो मोर इंसानी भाषा में बचाओ-बचाओ चिल्ला रहा है |

वह सब्जी वाला उस मोर को बचाने के लिए उन लोगों से भिड़ गया और मोर को आजाद करा लिया | इस बात से गुस्साए उन लोगों ने सब्जी वाले को अधमरा होने तक पीटा और उसे जंगल में ही छोड़कर, मोर को ढूँढने लगे, लेकिन फिर वो मोर नहीं मिला |

शाम तक मोर को ढूँढने के बाद वे लोग भी अपने घर चले गये | उन लोगों के जाने के बाद मोर आया और सब्जी वाले से बोला- मैं स्वर्ण-समुदाय का मोर हूँ; तुमने अपनी जान पर खेलकर मेरी जान बचायी है, मैं तुम्हारे लिए क्या कर सकता हूँ ?

सब्जी वाला अपनी अंतिम साँसें गिन रहा था, वो बोला- मेरा बचना मुश्किल है; मेरा घर यहाँ से थोड़ा दूर है, वहाँ मेरी पत्नी और दो बेटे हैं, तुम उनके लिए कुछ कर सकते हो तो कर दो !

वो स्वर्ण-मोर सीधे उसके घर गया, और सारा घटनाक्रम सुनाकर उसकी पत्नी से बोला- आपके पति मेरी जान बचाते हुए कुर्बान हो गये, इसलिए मैं आप लोगों की मदद के लिए हर रात आपको एक सोने का पंख दूँगा |

जो चला गया वो तो वापिस नहीं आ सकता था, पर रोज एक सोने का पंख मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति सुधरने लगी |

स्वर्ण-मोर का भी उनके साथ मन लगने लगा, एक दिन उसने कहा- जब मैं मर जाऊँगा, तब मुझे जलाना या दफनाना मत, खा देना ! इससे तुम्हारे बाल सोने के हो जायेंगे, फिर तुम्हें कभी गरीबी नहीं झेलनी पड़ेगी |

ऐसा सुनकर सब्जी वाले की पत्नी के मन में लालच आ गया, उसने मन ही मन सोचा-  रोज-रोज एक पंख के लिए इंतजार करने से अच्छा, क्यों ना इस मोर को आज रात ही मार के खा दिया जाये |

उस रात जब वो स्वर्ण-मोर सोने का पंख देने आया, सब्जी वाले की पत्नी ने अपने दोनों बेटों के साथ मिलकर स्वर्ण-मोर को दबोच लिया और ख़ुशी-ख़ुशी मार के खा गये, इस लालच में कि उनके बाल सोने के बन जायेंगे |

सुबह तक भी कुछ नहीं हुआ, कई दिनों तक जब कुछ नहीं हुआ तो वे समझ गये कि उनसे ऐसी गलती हो गयी जिसकी कीमत चुकाना नामुमकिन है |

दरअसल उस स्वर्ण-मोर ने कहा था, जब वह मर जायेगा, यानी प्राकृतिक रूप से मर जायेगा, ना कि मार दिया जायेगा |

प्रिय दोस्तों, बुरे दिनों के बाद अच्छे दिन जरूर आते हैं, उन अच्छे दिनों को संयम से संभालकर रखना चाहिए, अगर आप लालच में अंधे होकर काम करोगे तो अच्छे दिन बदलने में देर नहीं लगती | धन्यवाद|




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