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धन-दौलत पाने की जल्दी



दो दोस्त थे, शिक्षा-दीक्षा पूरी करने के बाद, दोनों जल्दी से जल्दी धन-दौलत कमाना चाहते थे| दोनों ने अपने गुरु के पास जाकर पूछा- गुरुजी, जीवन सुख-सुविधा और धन-वैभव से परिपूर्ण रहे, इसके लिए हमें सरलतम मार्ग बतायें?

गुरुजी ने कहा- सारी शिक्षा मैंने तुम्हें दे दी है, अब उसी शिक्षा से ही तुम्हें अपना जीवनयापन करना है, धैर्य तो रखना पड़ेगा; बाकी जल्दी का मार्ग तो भगवान को ही पता होगा|

दोनों ने धैर्य रखने से बेहतर भगवान से मार्ग जानना ज्यादा बेहतर समझा, और दोनों वन में जाकर तपस्या करने लगे|

भगवान उन दोनों की तपस्या देखके प्रकट हुये|

दोनों ने एक स्वर में भगवान से पूछा- प्रभु, हमने अपने गुरु से सुख-साधन और धन-वैभव कमाने का सरल मार्ग पूछा तो उन्होंने आपका पता दिया, कृपया आप हमें बतायें कि जल्दी से जल्दी सुख-साधन और धन-वैभव कैसे हासिल करें?

भगवान ने उन्हें दो मार्ग दिखाये; पहला मार्ग एकदम सामान्य था, कोई वैभव नहीं था, सामान्य लग रहा था, सुख-साधन की कोई ज्यादा झलक नहीं थी; दूसरा मार्ग एकदम जगमगाता हुआ, सोने-चांदी के महल, ऐश-आराम से भरा हुआ था |

भगवान ने कहा- पहला मार्ग सच्चाई-ईमानदारी पर टिका है और दूसरा मार्ग झूठ-बेईमानी पर टिका है| इन दोनों मार्गों में से तुम किसी भी मार्ग में जा सकते हो, पर ध्यान रहे आधा मार्ग पार करने के बाद वापिस नहीं आ सकते|

ऐसा कहके भगवान अन्तर्ध्यान हो गये|

दोनों दोस्तों को जल्दी से जल्दी सब हासिल करना था, वे दोनों जगमगाते हुये दूसरे रास्ते पर चल पड़े| उन्होंने जैसे ही सुनहरे रास्ते में कदम रखा, उनका सुख-सुविधाओं भरा जीवन शुरू हो गया, लेकिन झूठ-बेईमानी ने उनके दिल पर राज कर लिया|

दिन गुजरने लगे, दोनों दोस्त धन-वैभव के सागर में तैर रहे थे, आधा मार्ग कब पार हुआ पता ही नहीं चला, पर आधे रास्ते बाद वे डरने लगे, चिंता सताने लगी, जिस दौलत पर मजे ले रहे थे, उसके खोने का डर सताने लगा, एक अजीब ही भय रहता था, अथाह सुख-साधन होने पर भी सुकून नहीं रहता था| बुरी आदतों से शरीर रोगी बन गया, महल बड़े-बड़े थे लेकिन खुशियों के लिए एक चम्मच जगह नहीं थी| दोनों दोस्त भी आपस में एक-दूसरे से जलने-लड़ने लगे|

कुछ सालों बाद उनका देहांत हो गया, उनकी भगवान से फिर मुलाकात हुयी, उन्होंने पूछा- ऐसा क्यों हुआ?

भगवान ने कहा- तुमने जो तुरंत सुख-साधन वाला मार्ग चुना था वो झूठ-बेईमानी पर टिका था जबकि दूसरा मार्ग सच्चाई-ईमानदारी पर टिका था| झूठ-बेईमानी भय पैदा करती है, इसलिए तुम हमेशा डरे रहते थे, बुराइयों ने तुम्हारा जीवन खत्म कर दिया; जबकि सच्चाई-ईमानदारी हौसला पैदा करती है, इसलिए वहाँ के लोग हौसले से भरे रहते हैं और अच्छा जीवन जीते हैं|

दोनों दोस्तों को अपनी गलती का अहसास हुआ पर तब तक काफी देर हो चुकी थी. इतनी देर की वो चाहकर भी वापिस नहीं आ सकते थे|


प्रिय दोस्तों, यह हम सभी के साथ होता है, हम सभी दौलत-ऐश-आराम कमाना चाहते हैं, बड़े-बड़े सुखों का भोग करना चाहते हैं| दौलत कमाना और सुखों की कामना करना बुरी बात नहीं है, पर ध्यान रहे इन सुखों के चक्कर में कहीं आप झूठ और बेईमानी के रास्ते पर तो नहीं चल रहे हो, अगर आप चल रहे हो तो अभी भी संभल जाओ क्योंकि वहाँ आज तो सुखों का ढेर लग जायेगा, फिर कल को वही सुख चिंता बन जायेंगे, सताने लगेंगे| सच्चाई-ईमानदारी के रास्ते पर चलके जो सुख मिलेगा वो आजीवन आनंद देगा| बदलतीसोच(badaltisoch.com) आप सभी को सच्चाई-ईमानदारी के रास्ते पर चलके सुखों की कामना करने की सलाह देती है और सच्चाई-ईमानदारी के रास्ते पर चलके आपके उज्जवल सुखमय भविष्य के लिए आश्वस्त है| धन्यवाद|




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