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दिन और रात की कहानी



बात सृष्टि के शुरुआत की है, उस समय पृथ्वी अपने अक्ष पर नहीं घूमती थी| पृथ्वी के आधे हिस्से में सूर्य का वास था और आधे हिस्से में चन्द्र(चन्द्रमा) का वास था|

भगवान ने पृथ्वी पर जीवन की रचना की|

सूर्य पक्ष में दिन भर उजाला रहता था, वहाँ के जीव-जंतु पूरा दिन काम करते रहते, खाना खाते फिर दौड़-भाग-काम में लग जाते; इससे वे जल्दी-जल्दी दुर्बल होकर मरने लगे|

उधर चन्द्र पक्ष में हमेशा रात रहती थी, वहाँ के जीव-जंतु आराम फरमाते रहते, कुछ काम नहीं करते| यहाँ तक कि वे अपने भोजन के लिए भी मेहनत नहीं करते, बिना भोजन के उनका शरीर घटने लगा और वे भी जल्दी-जल्दी मरने लगे|

भगवान यह सब देख बड़ा चिंतित हुये|

भगवान ने सूर्य पक्ष वाले जीव-जंतुओं को बुलाकर पूछा- तुम दिन भर काम क्यों करते रहते हो ?

उन्होंने कहा- हमारे स्वामी सूर्य हमेशा हमारे सिर पर सवार रहते हैं, इसलिये हम काम करते रहते हैं, काम हमें प्रिय है|

फिर भगवान ने चन्द्र पक्ष वाले जीव-जंतुओं को बुलाकर पूछा- तुम हमेशा आराम ही क्यों करते रहते हो ?

उन्होंने कहा- हमारे स्वामी चन्द्र कभी आते हैं, कभी नहीं आते, कभी गायब ही हो जाते हैं| वो भी आराम करते रहते हैं, इसलिये हम भी आराम करते रहते हैं, आराम हमें प्रिय है|

दोनों के तर्क वाजिब थे, भगवान की चिंता और बढ़ गयी|

भगवान ने सूर्य को बुलाया और पूछा- तुम्हारे लोग काम ही करते रहते हैं, तुम उन्हें आराम करने के लिए क्यों नहीं बोलते ?

सूर्य ने कहा- मैंने खुद कभी आराम नहीं किया, मुझे क्या पता आराम क्या होता है !

फिर भगवान ने चन्द्र को बुलाया और पूछा- तुम अपने लोगों को काम करने के लिए क्यों नहीं बोलते हो?

चन्द्र ने कहा- काम क्या होता है, यह तो मुझे पता ही नहीं है !

सूर्य-चन्द्र भी भगवान की समस्या का हल नहीं निकाल पाए, तब भगवान ने पृथ्वी को बुलाया और सारा घटनाक्रम सुनाकर पूछा- क्या तुम्हारे पास इस समस्या का कोई हल है ?

पृथ्वी ने कहा- जब काम और आराम दोनों होगा तभी जीवन सही ढंग से चलेगा, यही इस समस्या का हल है|

काम और आराम बारी-बारी से कैसे होगा इस विषय में गहन सोचा गया, फिर सूर्य और चन्द्र से आधे-आधे दिन अपनी जगह बदलने को कहा तो उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया| तब पृथ्वी को कहा गया कि उन्हें ही अपने अक्ष पर इस प्रकार घूमते रहना है जिससे आधे दिन सूर्य दिखे और आधे दिन चन्द्र| इस तरह दिन-रात शुरू हुये, सभी जीव-जंतु दिन में काम करने के बाद रात को आराम करने लगे और पृथ्वी पर जीवन सुचारु रूप से चलने लगा|


प्रिय दोस्तों, काम और आराम का सही सामंजस्य जीवन के लिए जरूरी है| काम और आराम दोनों को महत्व देने से आपका जीवन व्यवस्थित रूप से चलेगा| धन्यवाद|




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