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पश्मीना भेड़



कश्मीर के पहाड़ी गाँव में पश्मीना प्रजाति की एक भेड़ रहती थी, उसके पूरे शरीर में नर्म-मुलायम लम्बे खूबसूरत सफ़ेद बाल थे, जिस वजह से वह भेड़ बेहद आकर्षक लगती थी |

एक दिन घास चरते-चरते वह भेड़ जंगल में पहुँच गयी | तभी कुछ शिकारियों का दल उस जंगल से गुजर रहा था | जैसे ही उन शिकारियों की नजर उस पश्मीना भेड़ पर पड़ी, वे उसके खूबसूरत नरम सफ़ेद बाल और खाल को पाने के लिए उत्सुक हो गये |

भेड़ को जब खतरा लगा, वह गाँव की तरफ भागने के बजाय जंगल की तरफ भागने लगी | शिकारियों ने उसका पीछा करना शुरू कर दिया |

भेड़ भागते-भागते, एक घनी झाड़ी के पीछे छुप गयी |

थोड़ी देर में शिकारी भी उसका पीछा करते हुए वहाँ आ पहुँचे, पर वे झाड़ी के पीछे छुपी भेड़ को देख नहीं पा रहे थे | काफी देर तक भेड़ को खोजने के बाद, वे आगे बढ़ गये |

उनके जाने के बाद, भेड़ अपनी होशियारी पर बड़ी प्रसन्न हुई | इस ख़ुशी में भेड़ ने उस घनी झाड़ी के पत्तों को चबाना शुरू कर दिया | कुछ ही देर में, वह काफी झाड़ी खा गयी |

उधर शिकारी उसे खोजते हुए, वापस उसी जगह पहुँच गये | भेड़ फिर से झाड़ी के पीछे छुप गयी, लेकिन अबकी बार झाड़ी घनी नहीं थी | शिकारियों ने भेड़ को देखकर, दबोच लिया |

भेड़ को अपने साथ ले जाते हुए, वे शिकारी आपस में बातें कर रहे थे- अगर यह भेड़ उस झाड़ी को नहीं खाती, तो हम इसे कभी पकड़ नहीं पाते | अपने रक्षाकवच को यह खुद ही चबा गयी |

यह सुनकर भेड़ को बड़ा दुःख हुआ, उसने खुद ही अपने बुरे वक़्त का सहारा मिटा दिया, जिस वजह से उसकी ऐसी दुर्गति हुई |


प्रिय दोस्तों, अच्छा वक़्त आने पर उन चीजों या मित्रों के साथ बुरा बर्ताव नहीं करना चाहिए, जो आपके बुरे वक़्त में आपके साथ थे, क्योंकि वक़्त फिर बदल जायेगा | अगर आप बुरे वक़्त के सच्चे साथियों को ही खो दोगे, तो फिर बुरे वक़्त में आपकी दुर्गति निश्चित है | धन्यवाद|



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