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बाबा के पुण्य कर्म



एक प्रसिद्ध बाबा थे, उनके भक्तिमय जीवन की बड़ी ख्याति थी, वे प्रतिदिन जप-ध्यान वगैरह करके अपने भक्तों को प्रवचन देते थे | उनके लाखों अनुयायी और भक्त देश-दुनिया में फैले हुए थे, वे सभी भक्त बाबा की सेवा में सदैव तत्पर रहते थे | भक्तों की अटूट सेवा से बाबा ने पूरा जीवन बड़े आराम से गुजारा |

जब बाबा की मृत्यु हो गयी, बाबा की आत्मा स्वर्ग के द्वार पर पहुँची | द्वार पर देवदूत, मृत लोगों से उनके शुभ-अशुभ कर्मों का ब्यौरा माँग रहे थे | बड़ी देर बाद बाबा की बारी आयी, देवदूत ने पूछा- तुम बताओ, तुमने अपने जीवन में क्या अच्छे काम किये ? ऐसे काम बताओ जिनका तुमको पुण्य मिलेगा |

देवदूत की बात सुनकर, बाबा ने ख़ुश होकर कहा- मेरा सारा जीवन प्रभु भक्ति में बीता है, मैंने सात बार सभी तीर्थों की यात्रा करी है |

देवदूत बोले- तुम अपनी तीर्थयात्रा का जिक्र हमेशा अपने प्रवचन में करते रहते थे, उन तीर्थयात्रा का बखान सुन-सुनकर तुम्हारे अनुयायियों ने धरती में तुम्हारा जीवन सुखमय बना दिया था, इसलिए यहाँ तुम्हें उन तीर्थयात्रा का कोई पुण्य नहीं मिलेगा, उन तीर्थयात्रा का पुण्य तुम धरती में भोग चुके हो | कोई अन्य पुण्य काम किया हो तो बताओ ?

देवदूत की बात सुनकर बाबा गंभीर सोच में पड़ गये, उन्होंने थोड़ा सोचकर कहा- मैं प्रतिदिन भगवान का ध्यान करता था, प्रभु भक्ति में लीन रहता था |

इस बात पर देवदूत ने कहा- तुम्हारी प्रभु भक्ति भी एक दिखावा थी, जो तुम अपने भक्तों और अनुयायियों को दिखाने के लिए करते थे | जब भी तुम्हारे अनुयायी आस-पास होते, तुम जप-ध्यान करने लगते, इसलिए इसका पुण्य भी नहीं मिलेगा |

यह सुनने के बाद, बाबा गर्दन झुकाए चुपचाप खड़े रहे |

देवदूत ने फिर पूछा- तुम कोई अन्य पुण्य कर्म बताओ ?

बाबा को कोई ऐसा काम याद नहीं आया, जो वो बता सकें, फिर उन्होंने कहा- मेरे लाखों भक्त मुझे पूजते थे, सदैव मेरी सेवा में तत्पर रहते थे |

देवदूत ने कहा- यहाँ ये सब नहीं देखा जाता कि किसके कितने अनुयायी और भक्त थे, यहाँ कर्मों का हिसाब देखा जाता है | तुमने कुछ पुण्य कर्म नहीं किया, झूठे दिखावे से लाखों लोगों को बेवकूफ बना के मजे से अपना जीवन जिया है, इसलिए तुम पाप के भागी हो |

ऐसा कहकर देवदूत ने बाबा को उनके झूठे आडम्बरों की सजा दी |

प्रिय दोस्तों, अपने नित्य कर्मों को पूरी ईमानदारी और लगन से करिये, वही पुण्य कर्म हैं, दिखावटी पूजा-पाठ करना पुण्य कर्म नहीं है | दिखावटी पूजा-पाठ और आडम्बर करने वालों से दूर रहना चाहिए, ऐसे लोग अपने समय के साथ दूसरों की समय-ऊर्जा भी बर्बाद करते हैं | धन्यवाद|



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