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कठिनाइयों से नहीं डरना



कोआल भालू ऑस्ट्रेलिया के जंगल में पाया जाने वाला एक शाकाहारी जानवर है | कोआल के नाम के साथ भालू शब्द जुड़ा है, पर यह सामान्य भालू की तरह बड़ा नहीं होता, कोआल दिखने में एक प्यारे से छोटे टेडी बियर की तरह लगता है | कोआल बहुत आलसी होता है, यह दिन में 20-21 घंटे सोता है और सिर्फ 3-4 घंटे ही भोजन वगैरह के लिए हरकत करता है |

एक बार कैटलर नाम का कोआल भालू अपने बच्चे के साथ किसी बड़े से पेड़ की शाखा में बैठा था | तभी उसका बच्चा बोला- पिताजी, मुझे बहुत भूख लगी है, आप मेरे खाने के लिए कुछ पत्तियाँ ले आओ |

कैटलर ने कहा- मैं तो ला सकता हूँ, पर अब तुम्हें खुद ही अपने लिए पत्तियाँ तोड़ना सीखना चाहिए |

बच्चा उदास होकर बोला- पिताजी, मुझे अच्छी पत्तियों की पहचान नहीं है |

कैटलर ने सुझाव दिया- बेटा, तुम दो तरीके से अपनी भूख मिटा सकते हो | पेड़ की मजबूत शाखाओं में उगी बूढी पत्तियों को खाकर, या फिर कमजोर डालियों में उगी नरम-मुलायम ताज़ी पत्तियों को खाकर |

नरम-मुलायम पत्तियाँ सुनकर बच्चे के मुँह में पानी आ गया ; पर जब उसने देखा कि नरम-मुलायम पत्तियाँ कमजोर डालियों में उगी हैं, जहाँ तक पहुँचना कठिन है, तो उसने पेड़ को कोसते हुए कहा- यह बहुत गलत बात है, ये नरम-मुलायम पत्तियाँ मजबूत डालियों में क्यों नहीं उगती ? ताकि उन्हें सभी खा सकें |

कैटलर ने समझाया- बेटा, अगर उन नरम-मुलायम पत्तियों तक सभी पहुँच पाते, तो उन्हें बढ़ने से पहले ही तोड़कर खा लिया जाता |

बच्चा चिंतित होकर बोला- इन पतली डालियों पर चढ़ना खतरनाक है, पांव फिसल सकता है, नीचे गिरकर चोट लग सकती है | इन नरम-मुलायम पत्तियों को तोड़कर खाना बहुत कठिन काम है |

कैटलर ने हौसला दिया- बेटा, जितना तुम डर रहे हो, असल में उतना खतरा नहीं है |

इस पर बच्चे ने तुरंत पूछा- अगर खतरा नहीं है, फिर सभी कोआल भालू ताज़ी नरम-मुलायम पत्तियाँ तोड़कर क्यों नहीं खाते ? कठिन है, तभी तो खतरा है |

कैटलर ने समझाया- ज्यादातर कोआल भालूओं को कठिनाइयों में समझौता करने की आदत पड़ चुकी है, वे चाहते तो नरम-मुलायम पत्तियाँ तोड़कर खा सकते हैं, पर जोखिम उठाने की हिम्मत नहीं रखते | लेकिन तुम ऐसा मत करो, अपने डर को जीतो और जो पाना चाहते हो, वो हासिल करो |

बच्चा समझ गया, वह तुरंत ही निडर भाव से आगे बढ़ा और नरम-मुलायम पत्तियों से अपनी भूख मिटाई |

प्रिय दोस्तों, जीवन अपने अनुसार जीना है, तो कठिनाइयों से नहीं डरना ; वरना जीवन में जो मिल रहा है उससे समझौता करना पड़ेगा | जिन्होंने निडर भाव से अपने दिल की सुनकर काम किया है, वही दुनिया में नाम कमा पाये हैं | धन्यवाद|



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