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पति-पत्नी के मन का बोझ



विक्रम एक सम्पन्न परिवार से था, उसके पास अच्छी नौकरी, अच्छा घर, और एक कुशल पत्नी थी ; दोनों पति-पत्नी अपने गृहस्थ जीवन से बहुत खुश थे | एक दिन किसी कारणवश विक्रम की नौकरी चली गयी, हालाँकि उसने दूसरी नौकरी कर ली, लेकिन दूसरी नौकरी इतनी अच्छी नहीं थी | तब से धीरे-धीरे उनके जीवन में समस्याएँ आने लगी, साल भर पहले जो पति-पत्नी प्यार भरा जीवन जी रहे थे, उन्हें अब एक-दूसरे में कमियाँ नजर आने लगी |

उनके दोस्तों ने उन्हें कई सलाह दी, लेकिन अब उनके रिश्ते में पहले जैसा प्यार ना था, वे हर समय अपनी समस्याओं में उलझे रहते और एक-दूसरे में कमियाँ ढूँढ़कर झगड़ते रहते |

एक दिन, विक्रम का एक पुराना दोस्त मिलने आया, जो कि मनोवैज्ञानिक डॉक्टर था | आपसी मेल-मिलाप के बाद, विक्रम और उसकी पत्नी, डॉक्टर दोस्त के साथ बातों में मशगूल हो गये |

डॉक्टर दोस्त बातों ही बातों में समझ गया कि विक्रम और उसकी पत्नी के आपसी रिश्ते मधुर नहीं हैं | तभी डॉक्टर दोस्त ने वहीं टेबल पर रखा पानी का गिलास उठाकर पूछा- क्या तुम दोनों बता सकते हो कि इस पानी के गिलास का वजन कितना होगा ?

इस सवाल पर, विक्रम और उसकी पत्नी अपने-अपने अनुमान के हिसाब से जवाब देने लगे | विक्रम ने गिलास का वजन पचास ग्राम बताया, तो उसकी पत्नी ने अस्सी ग्राम बताया |

दोनों के जवाब सुनने के बाद, डॉक्टर दोस्त बोला- खैर, इस गिलास का वजन जो भी होगा ; वह ज्यादा मायने नहीं रखता | मायने यह रखता है कि मैं इसे कितनी देर तक उठाये रखता हूँ, अगर मैं इसे पाँच मिनट तक उठाये रखूँ, तो मुझे ख़ास फर्क नहीं पड़ेगा | लेकिन मैं इसे लगातार एक घंटे तक उठाकर रखूँ, तो मेरा हाथ दुखने लगेगा, और अगर मैं इसे दिनभर उठाकर रखूँ, तो यक़ीनन मेरा हाथ सुन्न पड़ जायेगा, जिससे मुझे काफी तकलीफ होगी |

यह सुनकर विक्रम और उसकी पत्नी ने डॉक्टर दोस्त की बात पर सहमती जताई |

डॉक्टर दोस्त ने आगे कहा- इसी तरह हमारी समस्याएँ भी होती हैं, अगर मैं किसी समस्या के बारे में कुछ देर के लिए चिंता करूँ, तो इससे मेरे मन पर ज्यादा बोझ नहीं पड़ेगा ; पर यदि मैं उसी के बारे में लगातार सोचता रहूँ, दिन-रात उसको लेकर परेशान रहूँ, फिर यकीनन मेरा तनाव बढ़ जायेगा, तब समस्या छोटी हो या बड़ी, मैं हर समय परेशान रहूँगा, हो सकता है मैं अवसाद का शिकार हो जाऊं |

इसलिए बेहतर यही है कि पति-पत्नी अपने जीवन में आने वाली हर समस्या पर विचार-विमर्श करके उसका जल्द से जल्द उपाय ढूँढ लें और अपने मन का बोझ हल्का करके, अपना अमूल्य जीवन प्यार से जियें |

डॉक्टर दोस्त की बात का विक्रम और उसकी पत्नी पर बड़ा असर पड़ा | तब से हर छोटी-बड़ी समस्या पर वे दोनों आपस में सलाह-विचार करते, और इस तरह उनका जीवन फिर से खुशहाल हो गया |

प्रिय दोस्तों, हर किसी के दांपत्य जीवन में समस्याएँ आती हैं, पर इसका मतलब यह नहीं कि हम उन समस्याओं को अपने मन में बसा लें और तनाव करें, इससे आपके आपसी रिश्ते पर तो बुरा असर पड़ेगा, साथ ही साथ स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ सकता है | पति-पत्नी दोनों मिलकर आपसी समस्याओं का निदान करें और अपने अनमोल रिश्ते को ख़ुशी-ख़ुशी जियें | धन्यवाद|



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