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वो होनहार बच्चा



दस वर्षीय एक लड़के को एक दिन उसके स्कूल के अध्यापक ने एक पत्र दिया और कहा- यह पत्र घर जाकर अपनी माँ को दे देना |

उस लड़के ने घर आकर, वह पत्र अपनी माँ को दिया | माँ ने जैसे ही वह पत्र पढ़ा, उनकी आँखों में आँसू आ गये और वह जोर-जोर से रो पड़ी | जब उस बच्चे ने अपनी माँ को रोते हुए देखा, तो उसने अपनी माँ से पूछा- माँ, इसमें ऐसा क्या लिखा है, जो तू रो रही है ?

माँ ने आँसू पोंछकर, हँसते हुए कहा- बेटा, इसमें लिखा है कि आपका बच्चा बहुत होनहार है, वह अपने सहपाठियों से काफी तेज है | हमारा स्कूल आपके बेटे के लिए बहुत छोटे स्तर का है और हमारे अध्यापक भी इतने प्रशिक्षित नहीं हैं, जो हम इसे अच्छे से पढ़ा सके, इसलिए आप इसे किसी अच्छे से स्कूल में दाखिला दिलाएं |

उस बात को कई वर्ष बीत गये, वह लड़का बहुत प्रसिद्ध आविष्कारक बन चुका था, पर उस लड़के की माँ का अब स्वर्गवास हो गया था |

एक दिन वह अपनी पुरानी यादगार वस्तुओं को देख रहा था, तभी उसे एक पत्र दिखा, जो उसकी माँ की फोटोओं के साथ रखा हुआ था | उसने उस पत्र को उत्सुकतावश खोलकर पढ़ा, पत्र को पढ़ते ही उसकी आँखों से आँसू निकल आये |

यह वही पत्र था, जो उसे बचपन में उसके अध्यापक ने दिया था, जिसमें लिखा था- “ आपका बेटा बौद्धिक तौर पर मंदबुद्धि है, इसलिए हम उसे स्कूल से निकाल रहे हैं | आप उसकी पढाई की व्यवस्था कहीं दूसरी जगह कर लीजिये | “

ये कोई काल्पनिक कहानी नहीं है, बल्कि सत्य घटना है | ये कहानी बल्ब (bulb) और ग्रामोफ़ोन का आविष्कार करने वाले महान आविष्कारक “ थॉमस अल्वा एडिसन ” की है, जो कि बचपन में Austim नामक एक मानसिक बीमारी से ग्रसित थे, लेकिन अपनी माँ के प्रोत्साहन और मेहनत से एक महान आविष्कारक बन गये | यदि उनकी माँ ने उस पत्र को वैसा ही पढ़कर सुना दिया होता, जैसा कि अध्यापक ने लिखा था, तो हम आज भी लालटेन या मोमबत्ती जलाकर ही जी रहे होते |

उस पत्र को पढ़कर एडिसन हैरान रह गये और घण्टों रोते रहे, और फिर उन्होंने अपनी डायरी में लिखा- “ एक महान माँ ने बौद्धिक तौर पर कमजोर बच्चे को सदी का महान आविष्कारक बना दिया | ”

प्रिय दोस्तों, सच्चा प्रोत्साहन मिलने पर कमजोर और मंदबुद्धि बच्चा भी अपने इरादे मजबूत करके, बड़ा काम कर सकता है | अपने बच्चों को प्रोत्साहित करने वाली माँ, अपने बच्चों की सच्ची साथी होती है | धन्यवाद|



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