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घटती-बढ़ती तनख्वाह



कमलेश एक सेठ के यहाँ काम करता था, हमेशा काम पर आता, पूरी ईमानदारी और निष्ठा से सेठ की फैक्ट्री में काम करता | सेठ भी कमलेश के काम और ईमानदारी को देखकर सदा संतुष्ट रहता था |

एक दिन, कमलेश बिना बताये काम पर नहीं आया और कुछ दिन तक ऐसे ही गायब रहा | सेठ ने सोचा- आर्थिक तंगी के कारण कमलेश परेशान रहता होगा, इस वजह से काम के प्रति उदासीनता दिखा रहा होगा |
यही सोचकर सेठ ने कमलेश का मासिक वेतन बढ़ा दिया, ताकि कमलेश की काम के प्रति रुचि बढ़ने लगे |

महीने के अंत में कमलेश को जब बढ़ा हुआ वेतन मिला, तो वह कुछ नहीं बोला, चुपचाप रुपये पकड़ लिये |

कुछ महीनों बाद, कमलेश फिर से बिना बताये काम पर नहीं आया | इस बार वह और ज्यादा दिन तक गायब रहा |

सेठ को अबकी बार बहुत गुस्सा आया, सेठ ने सोचा- तनख्वाह बढ़ाने का क्या फायदा, जब कमलेश फिर से बिना बताये गायब हो गया !
यही सोचकर सेठ ने कमलेश का मासिक वेतन कम कर दिया |

महीने के अंत में कमलेश को जब कम वेतन मिला, तो इस बार भी वह चुप रहा, जितना वेतन दिया गया, उसने चुपचाप रख लिया |

यह देखकर सेठ को बड़ा आश्चर्य हुआ, उसने कमलेश से पूछा- जब मैंने तेरी तनख्वाह बढ़ाई, तब तू कुछ नहीं बोला, और आज जब तनख्वाह कम कर दी, तब भी तू खामोश रहा | तेरी ख़ामोशी का मतलब क्या है ?

कमलेश ने शांत भाव से जवाब दिया- मालिक, पहली बार जब मैं नहीं आया, तब मेरे घर में बेटी पैदा हुई थी ; आपने मेरी तनख्वाह बढ़ा दी, मैंने समझा कि भगवान ने मेरी बेटी के भरण-पोषण का हिस्सा भेज दिया है | अबकी बार मैं इसलिए नहीं आया, क्योंकि मेरे पिता का निधन हो गया था ; आपने मेरी तनख्वाह कम कर दी, मैंने समझा कि मेरे पिता अपना हिस्सा अपने साथ ले गये | इन्हीं दो कारणों से मैं दोनों बार चुप रहा |

सेठ को कमलेश के जीवन की सकारात्मकता देखकर बहुत अच्छा लगा, सेठ ने खुश होकर उसका वेतन फिर से बढ़ा दिया |

प्रिय दोस्तों, सुख-दुःख और उतार-चढ़ाव जीवन में आते-जाते रहते हैं | जीवन के प्रति सकारात्मक सोच रखिये, इससे आप सुखों का भरपूर मजा लेंगे और दुखों को आसानी से पार कर लेंगे | धन्यवाद|



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