A+ A-

शेर की ताकत



एक बार एक शेर ने युवा होने पर अपने परिवार से कहा- अब मैं जवान और ताकतवर हो गया हूँ, इसलिए अब मैं अपना शिकार स्वयं पकडूँगा और उसे स्वयं खाऊँगा |

इस तरह वह युवा शेर अपने परिवार से अलग होकर रहने लगा |

एक दिन उस युवा शेर ने एक सुँअर का शिकार किया, और बड़े ही चाव से उसको खा रहा था | तभी वहाँ एक गीदड़ आया, जो शेर के शिकार को ललचाई नजरों से देखने लगा |

शेर ने गीदड़ की नजर अपने शिकार पर देखी, तो उसने गीदड़ को भगा दिया |

कुछ देर बाद वह गीदड़ अपने एक साथी गीदड़ को बुला लाया, और वे दोनों गीदड़ शेर के शिकार को ललचाई नजरों से देखने लगे |

शेर ने फिर से उन दोनों गीदड़ को अपनी ताकत से डराकर भगा दिया |

इस तरह यह क्रम कुछ देर तक चलता रहा ; शेर, गीदड़ों को भगाता और वे गीदड़ अपने साथ एक अन्य गीदड़ को ले आते |

देखते ही देखते, गीदड़ परिवार के काफी सारे गीदड़ जमा हो गये, उनकी तादाद इतनी ज्यादा हो गयी कि अब शेर का उनको डराकर भगाना संभव नहीं था |

फिर उन सब गीदड़ों ने मिलकर शेर को ही भगा दिया और मजे से शिकार को खाने लगे |

शेर एक किनारे बैठकर, उन गीदड़ों को अपना शिकार खाते देख रहा था, जिसे उसने बड़ी मेहनत से पकड़ा था | उस समय शेर को परिवार का महत्व समझ में आया, उसे अपनी गलती का अहसास हुआ और वह वापस अपने परिवार के पास चला गया |

प्रिय दोस्तों, परिवार की एकता ही आपकी असली ताकत है | अगर परिवार में एकता हो, तो कमजोर से कमजोर सदस्य भी बलशाली बन जाता है | एक अकेला ताकतवर शेर, गीदड़ों के परिवार की एकता के सामने नहीं टिक सकता | धन्यवाद|



जरुर पढ़ें :