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मुख्यमंत्री जी ने समझी गलती



किसी राज्य के नये मुख्यमंत्री ने जिस दिन अपना पदभार ग्रहण किया, उसी दिन से राज्य की कानून व्यवस्था बिगड़ गयी | राज्य में चोरी, गुंडागर्दी, लूटपाट जैसी घटनाएँ बढ़ने लगी | जनता परेशान होने लगी, लेकिन मुख्यमंत्री और उनके मंत्रिमंडल के कान में जूँ तक नहीं रेंगी, वे लोग तो अपनी ही मौज में रहते थे | अधिकारी, कर्मचारी, सब जगह अराजकता का माहौल फैला हुआ था |

जब आम-जन की परेशानियाँ बढ़ने लगी, राज्य के कुछ विद्वान जन इस समस्या को लेकर पड़ोसी राज्य के प्रसिद्ध समाजसुधारक से मिलने गये और उनसे बोले- हमारे राज्य के मंत्री गैरजिम्मेदार बने हुए हैं, यदि ऐसा ही चलता रहा तो हमारे राज्य के लोगों का रहना मुश्किल हो जायेगा, फिर मजबूरन हमें अपनी जन्मभूमि छोड़कर दूसरे राज्य में पलायन करना होगा, कृपया हमारे मुख्यमंत्री को समझाएँ !

पड़ोसी राज्य के समाजसुधारक, उन लोगों के राज्य का हाल जानते थे, लिहाजा उन्होंने लोगों को आश्वस्त करते हुए कहा- आप लोग जाएँ, मैं जल्द ही कुछ उचित समाधान निकालूँगा |

कुछ दिन बाद वह समाजसुधारक, पड़ोसी राज्य के मुख्यमंत्री से मिलने आये | मुख्यमंत्री जी उन्हें जानते थे, उन्होंने समाजसुधारक का बड़े ही आदर-सत्कार से स्वागत किया |

बातों ही बातों में समाजसुधारक ने कहा- मैं आपसे एक प्रश्न पूछता हूँ ; यदि कुछ गुंडे-मवाली आपका अपहरण कर लें और आपके राज्य की कानून व्यवस्था आपको ढूँढने में असफल हो जाये, फिर वे अपहरणकर्ता आपको यातना दें, भूख-प्यास से आपके प्राण निकलने लगें, ऐसे में यदि वे लोग आपको अन्न-जल इस शर्त पर दें कि आप अपनी सारी संपत्ति उन्हें सौंप दोगे, तो आप क्या करोगे ?

मुख्यमंत्री ने सोचकर कहा- प्राण बचाने के लिए संपत्ति देनी पड़ेगी, संपत्ति फिर से कमाई जा सकती है |

यह सुनकर समाजसुधारक ने पुनः पूछा- अगर वे अपहरणकर्ता आपको यह कहकर आजाद कर दें कि आपको अपने राज्य से पलायन करना होगा और उनके मुखिया को राज्य का मुख्यमंत्री बनाना होगा, अन्यथा आपके प्राण ले लिए जायेंगे, तब आप क्या करोगे ?

मुख्यमंत्री ने असमंजस भाव से कहा- ऐसा करना बड़ा दुखद होगा, लेकिन प्राण बचाने के लिए पलायन करना ही बेहतर है | पर आप यह सब बेफिजूल के सवाल क्यों पूछ रहे हो ?

तब वह समाजसुधारक बोले- मंत्री जी, यह बेफिजूल के सवाल नहीं हैं | जब आप अपने प्राणों की रक्षा के लिए अपना सबकुछ लुटा सकते हो, तो जरा अपने राज्य की जनता के विषय में भी सोचिए, जो राज्य की बिगड़ी कानून व्यवस्था और बढ़ती अराजकता से पलायन पर मजबूर हो गयी है |

समाजसुधारक की बात सुनकर, मुख्यमंत्री जी को अपनी गलती का अहसास हुआ | उसी दिन से उन्होंने स्वयं और अपने मंत्रिमंडल की कार्यप्रणाली को व्यवस्थित किया, तथा राज्य की कानून व्यवस्था में सुधार किया, जिससे सब कुशल-मंगल होने लगा |

प्रिय दोस्तों, जितना ऊँचा पद, उतनी बड़ी जिम्मेदारी | उच्च पदों पर आसीन गणमान्य जन अगर अपने अधिकारों का उपयोग जनहित को ध्यान में रखकर, विवेकपूर्ण ढंग से करेंगे, तो वे समाज के आदर्श बन जायेंगे | धन्यवाद|



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