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नदी में तैरता हार



एक बार किसी समृद्ध प्रदेश की रानी अपनी सखियों के साथ स्नानगृह में जलक्रीड़ा कर रही थी, तभी एक कौआ आया और स्नानगृह के किनारे रखे रानी के आभूषणों में से रानी का बहुमूल्य हीरे-जवाहरात जड़ित हार लेकर उड़ गया |

स्नान पश्चात रानी ने जब अपने आभूषणों को देखा, तो रानी को अपना बहुमूल्य हार कहीं नजर नहीं आया, इस घटना से दुखी होकर रानी ने हार के चोरी होने की सूचना राजा को दी |

राजा ने राज्यभर में यह खबर फैला दी कि जो भी रानी का बहुमूल्य हीरे-जवाहरात जड़ित हार ढूँढ़कर लायेगा, उसे एक लाख स्वर्ण मुद्राएँ इनाम में दी जायेंगी |

पर कई दिनों तक ढूँढने के बाद भी वह हार नहीं मिला |

एक दिन, राजा अपने पाँच सिपाहियों के साथ जंगल में शिकार खेलने गया | शिकार की तलाश करते-करते जब राजा थक गया, राजा ने अपने एक सिपाही को पास में बहती नदी से पानी लाने को कहा |

सिपाही जैसे ही नदी के समीप पहुँचा, उसने रानी का बहुमूल्य हार नदी में तैरते हुए देखा, यह देखकर सिपाही की ख़ुशी का ठिकाना न रहा | सिपाही ने जैसे ही उस हार को निकालना चाहा, वह हार नदी में गायब हो गया | सिपाही ने सोचा- मैं खुद ही नदी में कूदकर उस हार को ढूँढ लेता हूँ, अगर मैंने हार ढूँढ लिया, राजा मुझे इनाम देंगे |
यह सोचकर वह सिपाही नदी में कूद गया |

कुछ देर बाद दूसरा सिपाही पहले सिपाही को ढूँढता हुआ आया, पहले सिपाही ने उसे सारा घटनाक्रम बताया ; दूसरा सिपाही भी इनाम के लालच में हार ढूँढने के लिए नदी में कूद गया |

इसी तरह अन्य तीन सिपाही भी एक-एक करके आये और नदी में कूदकर हार ढूँढने लग गये | काफी देर तक जब कोई सिपाही वापिस नहीं आया, राजा गुस्से में नदी की तरफ गया, वहाँ उसने पाँचों सिपाहियों को नदी में तैरते देखा |

राजा ने उनसे ऐसे तैरने का कारण पूछा, पाँचों सिपाहियों ने एक साथ कारण बताया |

तभी राजा की नजर नदी किनारे पेड़ पर पड़ी और राजा ने हँसते हुए कहा- मूर्खों ! तुम जिस हार को नदी में ढूँढ रहे हो, उसे मैंने यहीं पर खड़े रहकर ढूँढ लिया है, इसलिए तुममें से किसी को इनामी राशि नहीं मिलेगी |

सिपाहियों ने पूछा- महाराज, हार तो नदी में है, आपने कैसे ढूँढ लिया ?

राजा ने पेड़ की तरफ इशारा करके कहा- देखो, वह हार पेड़ पर लटका हुआ है, और जिसे तुम नदी में ढूँढ रहे हो, वह उसकी परछाई है |

दरअसल वह कौआ रानी के बहुमूल्य हार को उठा तो लाया था, पर जब उसे वह बेकाम का लगा, उसने उसे पेड़ पर ही छोड़ दिया ; जिससे हार की परछाई नदी में तैरती नजर आ रही थी |

प्रिय दोस्तों, किसी भी कर्म को करने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि जिस कामना पूर्ति के लिए आप कर्म कर रहे हो, क्या वो कर्म आपकी कामना पूर्ति करके आपको वास्तविक सुख दे पायेगा? क्योंकि कभी-कभी हमारे सुखों की मंजिल कहीं ओर रहती है, और हम उन सुखों को कहीं ओर खोजते रहते हैं | धन्यवाद|



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