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कौन किससे बंधा है ?



अहान नाम का एक व्यक्ति फ़कीर रहमत के पास पहुँचा, और सिर झुकाकर बोला- सांसारिक बंधनों ने मुझे घेर रखा है, मैं सांसारिक बंधनों के दुःख से आजादी पाना चाहता हूँ, कृपया मुझे रास्ता बताओ |

फ़कीर रहमत ने कहा- बेटा, सांसारिक बंधनों ने तुम्हें नहीं घेरा है, बल्कि तुमने सांसारिक बंधनों को घेर रखा है |

वह व्यक्ति अनजान भाव से बोला- मैं कुछ समझा नहीं !

तभी उधर से एक किसान, अपने बैल को ज़बरदस्ती खींचता हुआ ले जा रहा था | यह देखकर, फ़कीर ने उस किसान की ओर इशारा करके पूछा- क्या तुम बता सकते हो, उस किसान और बैल में से कौन किससे बंधा है ?

अहान ने तपाक से जवाब दिया- साफ़ दिख रहा है, बैल उस किसान से बंधा है |

फ़कीर ने फिर पूछा- अच्छा, अब यह बताओ कि कौन किसका मालिक प्रतीत होता है ?

अहान को यह मामूली सा प्रश्न लगा, उसने मुस्कराते हुए कहा- मालिक तो वह किसान ही है, कोई पशु भला मनुष्य का मालिक कैसे हो सकता है !

थोड़ी देर बाद किसान और बैल, साथ-साथ भागते हुए नजर आने लगे | गौर से देखने पर पता चला, बैल रस्सी तोड़कर भाग रहा था |

यह देखकर फ़कीर ने फिर से पूछा- अब बताओ वह किसान क्या करेगा ?

अहान ने हँसते हुए कहा- सामान्य सी बात है, वह किसान उस बैल को पकड़ने के लिए और ज्यादा तेजी से भागेगा, ताकि उसे पकड़ सके |

अहान का जवाब सुनकर, फ़कीर ने समझाते हुए कहा- तुम्हारी हालत भी उस किसान जैसे है ; जब उसके हाथ में बैल की रस्सी थी, तुम्हे लगा कि बैल उससे बंधा है, बैल का मालिक वह है, लेकिन वास्तव में वह किसान बैल से बंधा है, बैल उसका मालिक है | तभी तो बैल के भागते ही वह उसके पीछे-पीछे भागने लगा | ऐसे ही इंसान अपने सांसारिक बंधनों से अनजान बना रहता है, यही उसके सांसारिक बंधनों के दुःख का कारण है |

इस तरह अहान को समझ आया- यदि अपने सांसारिक बंधनों के दुःख से आजादी चाहिए, तो पहले अपने सांसारिक बंधनों को समझना होगा |

प्रिय दोस्तों, सांसारिक बंधनों को समझना, सांसारिक बंधनों के दुःख को दूर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है | धन्यवाद|



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