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जादुई मीठी गोलियाँ



शैफाली और उसकी सास के बीच छोटी-छोटी बातों पर अक्सर झगड़ा होता रहता था | सास किसी ना किसी बहाने अपनी बहू शैफाली को खूब खरी-खोटी सुनाती रहती और यह सब सुन-सुनकर शैफाली भी सास को अपशब्द बोलती रहती थी |

उन दोनों के झगड़ों से उनके परिजन ही नहीं, आस-पास रहने वाले लोग भी परेशान रहते थे | सबने उन दोनों को बहुत समझाया, लेकिन उन पर कोई असर नहीं होता था |

एक दिन उन दोनों ने अखबार में किसी संत के बारे में पढ़ा, जो शहर में नए आये थे | उनकी ख्याति सुनकर, सास उनसे मिलने गयी और अपनी समस्या सुनाई- बाबा, मैं अपनी बहू से बड़ी परेशान हूँ, वह हमेशा मुझसे लड़ती रहती है | कुछ ऐसा उपाय बताओ, जिससे वह मुझसे लड़ना बंद कर दे |

संत ने सास को सौ मीठी गोलियाँ दी और कहा- जब भी तुम्हें बहू से कुछ कहना होगा, इनमें से एक मीठी गोली को अपने मुँह में डाल देना | ध्यान रहे, जब तक मीठी गोली मुँह में रहे, तब तक अपनी बात खत्म कर देना | इस तरह जब भी तुम्हें बहू से कुछ कहना हो, तब एक मीठी गोली मुँह में डाल देना |

उसी शाम, बहू भी चुपके से संत के पास आयी और अपनी समस्या सुनाई- बाबा, मेरी सास मुझे हमेशा बुरा-भला कहती रहती है | आप मुझे ऐसा उपाय बताओ, जिससे मेरी सास मुझे कुछ भी बुरा-भला ना कहे |

संत ने शैफाली को भी सौ मीठी गोलियाँ देकर कहा- जब भी तुम्हारी सास तुमको अपशब्द कहे, इनमें से एक मीठी गोली मुँह में डाल देना | ध्यान रहे, मीठी गोली तब तक रहनी चाहिए जब तक तुम्हारी सास अपनी बात खत्म नहीं करती |

अगले दिन, जब सास को बुरा-भला कहना था तो पहले उसने एक मीठी गोली अपने मुँह में डाली | मीठी गोली इतनी स्वादिष्ट थी कि सास का पूरा ध्यान गोली के स्वाद में चला गया और बुरा-भला कहने के बजाय उसने मधुरता से अपनी बात कह दी |

वहीं जैसे ही सास ने एक शब्द कहा, शैफाली ने भी मीठी गोली अपने मुँह में डाल दी | इससे उसका ध्यान भी मीठी गोली के स्वाद पर चला गया और उसने भी चुपचाप अपनी सास की बात सुन ली |

कुछ दिन तक ऐसे ही चलता रहा, सास मधुरता भरे लहजे में बातें कहती और शैफाली भी चुपचाप सुन लेती | घर का माहौल एकदम शांत हो गया, सब घरवाले चकित हो गए, किसी को भी अचानक परिवर्तन का कारण समझ नहीं आया |

कुछ दिन बाद, वे सौ मीठी गोलियाँ ख़त्म हो गयी | इसलिए सास संत जी से मिलने पहुँची और उसी समय संयोगवश शैफाली भी संत जी से मिलने पहुँच गयी |

संत ने दोनों को एक साथ देखकर हँसते हुए पूछा- क्या हुआ, मीठी गोलियाँ ख़त्म हो गयी ?

दोनों ने हाँ में सहमती जताई और एक साथ कहा- बाबा, वे जादुई मीठी गोलियाँ और दे दीजिये !

संत ने समझाया- जादू उन मीठी गोलियों का नहीं, तुम्हारी जुबान का है | मीठी गोलियों के स्वादिष्ट स्वाद की वजह से तुम दोनों की जुबान मधुर हो गयी थी, इसलिए सब जुबान की मधुरता का जादू है, ना कि मीठी गोलियों का !

यह बात सुनकर, शैफाली और उसकी सास बहुत लज्जित हुई | उन्होंने तुरंत ही एक-दूसरे को गले लगाकर भविष्य में कभी नहीं झगड़ने का फैसला किया |

प्रिय दोस्तों, कर्कश वाणी तो आपके घनिष्ठ रिश्तों में भी कड़वाहट घोल देती है, जबकि मीठी वाणी अमृत समान है, जो आपके शत्रु को भी मित्र बना देती है | हमेशा मीठी वाणी बोलने का प्रयत्न करना चाहिए | धन्यवाद|



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