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मंदिर का विशेष दरवाजा



एक बार एक युवक अपनी वृद्ध माँ को काशी के सुप्रसिद्ध मंदिर में भगवान के दर्शन करवाने के लिए लाया | मंदिर में बहुत भीड़ थी, इसलिए उस युवक ने अपनी वृद्ध माँ को एक किनारे बिठाया, और खुद भक्तों की पंक्ति में खड़ा होकर अपनी बारी का इंतजार करने लगा |

तभी उस वृद्ध महिला की नजर एक व्यक्ति पर पड़ी | वह व्यक्ति दूसरे शहर से आये भक्तों से कुछ पूछता और उनसे हजार रुपये लेकर उन्हें अपने साथ ले जाता, फिर पाँच-दस मिनट में उन्हें वापस भी ले आता |

यह क्रम कुछ देर तक चलता रहा | वृद्ध महिला उस व्यक्ति को बड़े गौर से देख रही थी और उसकी हरक़तों को अच्छे से समझ गयी थी |

जब उस व्यक्ति ने वृद्ध महिला को देखा तो वह समझ गया कि वृद्ध महिला भी दूसरे शहर से आयी है, इसलिए उस व्यक्ति ने वृद्ध महिला के पास आकर पूछा- भगवान के दर्शन-पूजन करने आये हो?

वृद्ध महिला ने कहा- हाँ, करनी तो है, मगर भीड़ बहुत है, इसलिए मेरा बेटा पंक्ति में खड़ा हो रखा है |

व्यक्ति ने तुरंत सुझाव दिया- यह लम्बी पंक्ति तो आम आदमियों की है | मंदिर में प्रवेश करने का एक विशेष दरवाजा है, जो विशेष व्यक्तियों के लिए खुला रहता है, अगर आप चाहें तो मैं आपको और आपके बेटे को उस विशेष दरवाजे से भगवान के दर्शन करवा सकता हूँ ; पर उस विशेष दरवाजे से भगवान के दर्शन करने के लिए कम से कम एक हजार रुपये लगेंगे |

वृद्ध महिला ने पूछा- क्या उस विशेष दरवाजे से दर्शन करने पर कोई विशेष लाभ प्राप्त होगा ?

व्यक्ति बोला- नहीं माताजी, ऐसा तो कोई विशेष लाभ प्राप्त नहीं होगा, पर आप जैसे बुजुर्ग लोगों को पंक्ति में लगने से आराम मिल जायेगा, समय की बचत होगी, यह फायदा क्या कोई कम है !

वृद्ध महिला ने आड़े हाथों लेते हुए कहा- अगर यहाँ आकर भी किसी के पास भगवान के लिए समय नहीं है तो उसका यहाँ आने का कोई औचित्य नहीं है | अच्छा चलो मैं आपको पच्चीस हजार रुपये दूँगी, अगर आप भगवान को बाहर लाकर मुझे विशेष पूजन करवा दें |

व्यक्ति ने झेंपते हुए कहा- आखिर भगवान कैसे बाहर आ सकते हैं !

वृद्ध महिला ने तुरंत कहा- क्यों नहीं आयेंगे, जब आप विशेष दरवाजे से भक्तों को अन्दर ले जा सकते हो तो फिर ऐसे ही किसी विशेष दरवाजे से भगवान को भी तो बाहर ला सकते हो | अच्छा चलो पाँच लाख रुपये ले लेना मगर शर्त यही है कि भगवान को बाहर लाकर दर्शन करवा दीजिए |

यह सुनकर वह व्यक्ति हक्का-बक्का रह गया और वहाँ से चुपचाप गर्दन झुका कर चला गया | उसके बाद उस व्यक्ति में किसी से भी विशेष दरवाजे से दर्शन करवाने के लिए पूछने का साहस नहीं बचा था और वहाँ पर खड़े अन्य लोगों को भी समझ में आ गया कि विशेष दरवाजे से दर्शन करने का कोई लाभ नहीं है |


प्रिय दोस्तों, भगवान के नाम पर भक्तों को बेवकूफ बनाने वाले ऐसे लोगों के जाल में नहीं फंसना चाहिए ; भगवान के लिए सभी बराबर हैं, भगवान प्यार और श्रद्धा से खुश होते हैं, ना कि किसी विशेष दर्शन और पूजन से | धन्यवाद|