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अधूरी बातें



एक व्यक्ति बहुत धनवान था ; धन-दौलत, शान-शौकत सब कुछ था, पर उस व्यक्ति के पास समय की बहुत कमी थी, उससे मिलने के लिए भी समयादेश लेना पड़ता था, यहाँ तक कि उसके पास अपने घर वालों के साथ उठने-बैठने का भी पर्याप्त समय नहीं था |

एक दिन अकस्मात उसकी मृत्यु हो गयी, पति की मृत्यु पर उसकी पत्नी बहुत दुखी थी | उसकी मृत्यु को महीने गुजर गए लेकिन उसकी पत्नी का दुःख बिल्कुल भी कम नहीं हुआ | अमूमन, अथाह सुख-सुविधाओं के बीच इंसान अपना दुःख भूल जाता है लेकिन उसकी पत्नी के साथ ऐसा नहीं हुआ |

एक दिन उसकी सहेली ने उसे सहारा देते हुए कहा- होनी को कौन टाल सकता है, अब अपना और अपने बेटे के भविष्य के विषय में सोचो | हम सब तुम्हारे साथ हैं, बस तुम इस दुःख से निकलकर नए जीवन की शुरुआत करो |

उसने कहा- मैं अपने पति की मृत्यु पर इतनी दुखी नहीं हूँ, मृत्यु तो एक दिन प्रत्येक इंसान को आती है |

सहेली ने चौंककर पूछा- तो फिर किस बात से दुखी हो ?

उसने बताया- उनकी मृत्यु के बाद एक सवाल मेरे मन में आया, जो मुझे दुखी कर रहा है, जिसका जवाब किसी के पास नहीं है |

सहेली ने हौसला देते हुए पूछा- मुझे बताओ क्या बात है ? दुःख बाँटने से कम होता है |

उसने कहा- जिस दिन मेरी शादी हुई, मैं बहुत खुश थी कि अपने पति के साथ ख़ुशी-ख़ुशी नई जिंदगी की शुरुआत करूँगी, उस समय हम इतने अमीर नहीं थे लेकिन मुझे इस बात से कोई समस्या नहीं थी, जितना भी था मैं उसी में खुश रहने के ख्वाब देखती थी | शादी के अगले दिन ही यह ख्वाब कहीं खो गया | सुबह सात बजे वो ऑफिस चले जाते थे, रात को ग्यारह बजे आते थे, हर दिन की यही दिनचर्या थी, उन पर धन-दौलत कमाने का भूत सवार था | मैंने बहुत समझाया, पर वह नहीं माने ; धन-दौलत के अमीर बन गए, लेकिन समय के गरीब हो गए | मुश्किल से वह रोज मेरे साथ सिर्फ आधा या एक घंटा ही ढंग से बातें कर पाते थे, प्रतिदिन लगभग एक घंटा के हिसाब से साल में 365 घंटे हुए | मेरी शादी को 24 साल हो गए, अगर हिसाब लगाया जाए तो उन्होंने सिर्फ मेरे साथ एक साल का ही समय व्यतीत किया | उस एक साल में मैं उनसे पूरी बातें भी नहीं कर पायी, मुझे उनसे जो बातें करनी थी वो आज मेरे दिमाग में घूमती रहती हैं | उनकी कमाई हुई धन-दौलत तो यहीं रह गयी, पर वो चले गए | छोटी-छोटी खुशियाँ जो हमें साथ बितानी चाहिए थी, जो मेरे जीवन का ख्वाब था, वो ख्वाब सिर्फ ख्वाब ही रह गया | दुनिया की नजर में मेरा वैवाहिक जीवन 24 साल का था, पर वास्तव में वह सिर्फ एक साल का ही था | उस एक साल के वैवाहिक जीवन की अधूरी बातें अब कभी पूरी नहीं हो सकती, दुःख सिर्फ इतना है | क्या धन-दौलत इसकी भरपाई कर सकता है ? सवाल बस इतना ही है !

यह सुनकर सहेली की आँखों से आंसू निकल आये, क्योंकि उसके पास भी इस सवाल का जवाब नहीं था |

प्रिय दोस्तों, धन-दौलत और भौतिक साधन कमाने के चक्कर में अपने परिवार की छोटी-छोटी खुशियों को नजरअंदाज मत कीजिये, क्योंकि आपके जाने के बाद धन-दौलत की कमी तो पूरी हो सकती है लेकिन आपकी कमी कभी पूरी नहीं हो सकती | धन्यवाद|