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बढती दिलों की दूरी



रमेश एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करता था, अभी हाल ही में रमेश का तबादला लखनऊ से दिल्ली हो गया था, वह अपने परिवार सहित दिल्ली के एक मोहल्ले में किराये के मकान में शिफ्ट हो गया |

दिल्ली में शिफ्ट होने की अगली सुबह रमेश और उसके परिवार के सदस्यों ने देखा कि बगल पड़ोसी शर्मा जी के यहाँ से जोर-जोर से चिल्लाने और लड़ने-झगड़ने की आवाजें आ रही थी |

किसी अनहोनी की आशंका से रमेश ने बाहर आकर एक अन्य पड़ोसी गुप्ता जी से लड़ाई-झगड़े का कारण पूछा, तो गुप्ता जी ने अनजान भाव से कहा- रमेश जी, ये रोज की कहानी है, इस ओर ध्यान मत दीजिए |

उस सुबह तो रमेश ने सामान्य पारिवारिक तनाव समझकर अपने कानों में परदा डाल दिया, लेकिन जब अगले दो दिन तक शर्मा जी के घर से सुबह-शाम लड़ने-झगड़ने और जोर-जोर से चिल्लाने की आवाजें आती रही, तो रमेश को यह सब देख-सुनकर अच्छा नहीं लगता था |

रमेश का पारिवारिक माहौल शांत और आनंदमय था, लेकिन पड़ोस में होने वाला सुबह-शाम का लड़ाई-झगड़ा भी तो सुना नहीं जाता था |

पड़ोस का अशांत माहौल, रमेश के दोनों बेटों के लिए भी एकदम नया था ; इसलिए तीसरे दिन जब रमेश ऑफिस से घर आया तो उसके छोटे बेटे ने पूछा- पापा, हमारे पड़ोसी इतना लड़ते-झगड़ते क्यों हैं ?

बड़े बेटे ने समझदारी दिखाते हुए कहा- क्योंकि क्रोध में इंसान मानसिक शांति खो देता है, इसलिए ये लोग लड़ते-झगड़ते-चिल्लाते हैं |

छोटे बेटे ने तपाक से पूछा- जब ये लोग एक ही घर में रहते हैं, फिर ये अपनी बातें धीमी आवाज में भी कर सकते हैं, इन्हें इतना चिल्लाने की क्या जरुरत है ?

इस सवाल पर रमेश ने दोनों बेटों को पास बुलाकर समझाया- जब दो व्यक्ति एक-दूसरे से नाराज होते हैं, तो वे एक-दूसरे पर गुस्सा करते हैं जिससे उनके दिलों के बीच दूरी बढ़ने लगती है, इस अवस्था में एक-दूसरे को बिना चिल्लाये नहीं सुना जा सकता है ; वे जितना ज्यादा गुस्सा करेंगे उनके दिलों के बीच की दूरी उतनी ज्यादा बढ़ जाएगी और उन्हें उतना ही ज्यादा चिल्लाना पड़ेगा, गुस्सा करने पर वे एक-दूसरे की भावनाओं को नहीं समझ पाते हैं और फिर एक-दूसरे से लड़ते-झगड़ते हैं | लेकिन यदि वे गुस्सा नहीं करते, एक-दूसरे के साथ प्रेम से रहते हैं, तब उन्हें एक-दूसरे पर चिल्लाना नहीं पड़ता, बल्कि वे आपस में धीरे-धीरे बातें करते हैं, क्योंकि उनके दिल एक-दूसरे के करीब होते हैं, वे एक–दूसरे की भावनाओं को समझते हैं और लड़ते-झगड़ते नहीं हैं | और जब वे एक-दूसरे से बेहद प्रेम करते हैं, तब वे बोलते भी नहीं हैं, बिना कहे नजरों ही नजरों में एक-दूसरे की भावनायें समझ जाते हैं | इसलिए अपने परिवार वालों और मित्रों के साथ हमेशा इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि तुम्हारे दिल हमेशा एक-दूसरे के करीब बने रहें ; ऐसा व्यवहार और कर्म मत करो जिससे तुम्हारे दिलों की बीच की दूरी बढ़ जाए, नहीं तो एक समय ऐसा आता है जब दिलों के बीच की दूरी इतनी अधिक बढ़ जाती है कि चिल्लाने पर भी दूसरे को तुम्हारी बातें और भावनायें समझ नहीं आती |

इस तरह रमेश ने अपने दोनों बेटों को जीवन की नेक सीख के साथ हमेशा प्रेम से रहने का संदेश दिया | कुछ दिन बाद, रमेश अपने परिवार सहित शहर की किसी दूसरी शांत जगह में शिफ्ट हो गया |

प्रिय दोस्तों, हमेशा ऐसे व्यवहार और कर्मों से बचना चाहिए जिससे एक-दूसरे के प्रति नाराजगी और क्रोध पैदा हो जाए, क्योंकि क्रोध रिश्तों में दरार पैदा करता है ; क्रोध जितना बढ़ता रहेगा, रिश्तों की दरार खाई में बदलती रहेगी | धन्यवाद|