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जामुन का बड़प्पन



एक जंगल में जामुन का पेड़ था; उसके बगल में साल का हज़ार वर्ष पुराना पेड़ था, जो बहुत घना और विशाल था |

साल के पेड़ को स्वयं की आयु, स्वास्थ्य और मजबूती पर बड़ा अभिमान था; वह अपने पड़ोसी जामुन के पेड़ से सीधे मुँह बात तक नहीं करता था |

एक बार, लाल चींटियों का सरदार, घोंसला बनाने के लिए उचित जगह की तलाश करते हुए साल के पेड़ के पास आकर विनम्र भाव से पूछने लगा- हे महान साल वृक्ष ! आपकी शाखाएं बहुत विशाल हैं, आपका तना बहुत मजबूत है, क्या मैं आपके पेड़ के नीचे अपना घोंसला बना सकता हूँ? आपके पेड़ की छाया में मेरा और मेरे दोस्तों का परिवार सुरक्षित रहेगा |

साल का पेड़ रौब दिखाते हुए बोला- ऐसा सोचना भी मत ! यहाँ से चले जाओ, अपना घोंसला कहीं और बनाओ |

बगल में खड़े जामुन के पेड़ ने साल के पेड़ से निवेदन किया- साल भाई, बना लेने दो इसे अपना घोंसला | तुम्हारे पेड़ की छाया में इसका परिवार धूप-बारिश, आँधी-तूफ़ान से बचा रहेगा |

साल का पेड़, जामुन के पेड़ पर बिगड़ते हुए बोला- तुम बीच में क्यों बोल रहे हो? अगर तुम्हें इस पर इतनी ही दया आ रही है, तो तुम अपने नीचे इसे जगह दे दो |

जामुन का पेड़ इस बात से सहमत हो गया और लाल चींटियों के सरदार ने जामुन के पेड़ का धन्यवाद करते हुए उसके नीचे अपना घोंसला बना दिया |

कुछ दिन बाद, वहाँ चार लकड़हारे आये और आपस में बातचीत करने लगे |

उनमें से एक बोला- इस जामुन के पेड़ को काट देते हैं |

तभी, दूसरे व्यक्ति ने सचेत किया- रुको ! जामुन के पेड़ के नीचे लाल चींटियाँ हैं, लाल चींटियाँ बहुत खतरनाक डंक मारती हैं, इसलिए इसे संभलकर काटना होगा |

इस बात पर, तीसरे व्यक्ति ने सुझाव दिया- क्यों ना हम जामुन के पेड़ के बजाय इसके बगल वाले साल के पेड़ को काटते हैं | साल का पेड़ बहुत विशाल है, इसका तना बहुत मजबूत है, हमें ढेर सारी इमारती लकड़ी मिल जायेगी, जिससे हमें बहुत मुनाफा होगा | जामुन का पेड़ काटकर इतना फायदा नहीं होगा, हम साल के पेड़ को काटते हैं, यह ज्यादा बेहतर रहेगा |

तीसरे व्यक्ति के सुझाव से चारों सहमत हो गए |

वे लोग जैसे ही साल के पेड़ को काटने लगे, साल का पेड़ जोर-जोर से बचाने की गुहार लगाने लगा |

तब लाल चींटियों ने लकड़हारों पर हमला कर, उन्हें वहाँ से भागने को मजबूर कर दिया |

जान बचने के बाद, जब साल के पेड़ ने लाल चींटियों का धन्यवाद करना चाहा, तो लाल चींटियों के सरदार ने कहा- धन्यवाद हमारा नहीं, धन्यवाद तो जामुन के पेड़ का करो | अगर यह हमें आपकी रक्षा करने को नहीं कहते, तो हम कभी आपकी रक्षा नहीं करते |

साल के पेड़ का सारा अभिमान चूर-चूर हो गया था, उसने जामुन के पेड़ से अतीत में किये अपने अभिमानपूर्ण बुरे बर्ताव के लिए क्षमा माँगी |

जामुन के पेड़ ने विनम्र भाव से बड़प्पन दिखाते हुए उसे माफ़ कर दिया |

प्रिय दोस्तों, कभी-कभी हमारी लोकप्रियता और बड़े होने का अहसास हमें घमंडी और क्रूर बना देता है, जिससे हम अपने प्रिय लोगों से दूर हो जाते हैं | सदैव अभिमान से बचना चाहिए | धन्यवाद|